करतब या लापरवाही? सपेरे के शो में बुजुर्ग को सांप ने डसा

महेंद्र सिंह
महेंद्र सिंह

औरैया कोतवाली क्षेत्र के गोविंद नगर में एक साधारण दोपहर अचानक सनसनी में बदल गई। मोहल्ले में आए एक सपेरे का “मनोरंजन शो” कुछ ही मिनटों में डरावनी हकीकत बन गया। भीड़ ताली बजा रही थी, मोबाइल कैमरे ऑन थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह करतब सीधे अस्पताल तक पहुंचा देगा। रामजी दुबे, जो अपने घर के बाहर खड़े तमाशा देख रहे थे, अचानक खुद इस ‘शो’ का हिस्सा बना दिए गए।

मजाक में गले में डाला सांप, और फिर…

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सपेरा करतब दिखाते-दिखाते जोश में आ गया। उसने हंसी-मजाक में सांप को रामजी दुबे के गले में डाल दिया। शुरुआत में लोग इसे सामान्य खेल समझते रहे। लेकिन कुछ ही पलों में हालात बदल गए।

सांप ने अचानक उनकी उंगली में काट लिया। भीड़ जो अभी तक एंटरटेन हो रही थी, अब चीख-पुकार में बदल गई। वीडियो बना रहे लोग अब रास्ता बनाने लगे। यह वही पल था जब “लोकल तमाशा” सीधे “मेडिकल इमरजेंसी” बन गया।

समय रहते अस्पताल, हालत फिलहाल स्थिर

घटना के तुरंत बाद परिजन और मोहल्ले के लोग रामजी दुबे को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। भर्ती कर डॉक्टरों ने तुरंत उपचार शुरू किया। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचना बड़ा फैक्टर रहा। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन निगरानी जारी है।

यह साफ है snake bite में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

सपेरा मौके से गायब, सवाल बाकी

घटना के बाद सपेरा वहां से चला गया। अब मोहल्ले में सवाल गूंज रहे हैं, बिना सुरक्षा के ऐसे करतब क्यों? भीड़ के बीच जंगली जीवों का प्रदर्शन कैसे allowed है?

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि “मनोरंजन” के नाम पर जान जोखिम में डालना बर्दाश्त नहीं होना चाहिए।

पब्लिक सेफ्टी बनाम स्ट्रीट शो

ग्राउंड लेवल पर सच्चाई यह है कि छोटे शहरों में ऐसे प्रदर्शन आम हैं। लेकिन सवाल है क्या पब्लिक सेफ्टी का कोई प्रोटोकॉल है? Snake handling कोई खिलवाड़ नहीं। जरा सी चूक, और नतीजा ICU तक पहुंच सकता है। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और सेफ्टी सिस्टम पर भी सवाल खड़ा करती है।

अब निगाहें प्रशासन पर हैं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे “करतब” फिर किसी और परिवार की परीक्षा ले सकते हैं। मोहल्ले में अभी भी चर्चा गर्म है। लोग कह रहे हैं — “तमाशा देखने गए थे, मौत का खतरा लेकर लौटे।”

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